Criminal Lawप्रकाशित तिथि: June 21, 20267 min read

डिफॉल्ट जमानत: 60वें दिन आवेदन करें, नहीं तो अधिकार हमेशा के लिए खत्म

सहारनपुर में जब किसी को गिरफ्तार किया जाता है और पुलिस समय पर जांच पूरी नहीं कर पाती, तो कानून आरोपी को एक विशेष शस्त्र देता है — डिफॉल्ट जमानत (जिसे वैधानिक जमानत या अनिवार्य जमानत भी कहते हैं)।

यह कोई राहत नहीं — यह धारा 479 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत एक निरपेक्ष कानूनी अधिकार है, जो 1 जुलाई 2024 से CrPC की धारा 167(2) की जगह लागू है।

यह अधिकार शक्तिशाली है। लेकिन जैसे ही पुलिस चार्जशीट दाखिल करती है — चाहे अंतिम दिन की सुबह ही क्यों न हो — यह अधिकार हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है।


डिफॉल्ट जमानत क्या है?

नियमित जमानत में अदालत कई पहलू तौलती है: अपराध की गंभीरता, फरार होने का खतरा, सबूत से छेड़छाड़ की संभावना, आपराधिक इतिहास। अदालत का विवेक होता है।

डिफॉल्ट जमानत अलग है। यदि शर्तें पूरी हो जाएं, तो अदालत के पास कोई विवेक नहीं। उसे जमानत देनी ही होगी। सर्वोच्च न्यायालय ने बार-बार कहा है कि यह अधिकार अनुच्छेद 21 (व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) से सीधे जुड़ा है।

उद्देश्य स्पष्ट है: यदि राज्य समय-सीमा में जांच पूरी नहीं कर पाया, तो उसे आरोपी को हिरासत में रखने का कोई औचित्य नहीं।


दो समय-सीमाएं: 60 दिन और 90 दिन

60 दिन — अधिकांश आपराधिक मामलों के लिए। जब अपराध की सजा 10 वर्ष से कम हो (मृत्युदंड या आजीवन कारावास नहीं)।

90 दिन — जब अपराध में सजा है:

- मृत्युदंड

- आजीवन कारावास

- 10 वर्ष या अधिक कारावास

सहारनपुर में 90 दिन वाले सामान्य मामले: हत्या (धारा 103 BNS), गैर-इरादतन हत्या (धारा 105 BNS), बलात्कार (धारा 63 BNS), फिरौती के लिए अपहरण (धारा 140 BNS), NDPS में व्यावसायिक मात्रा।

FIR में यदि 10 वर्ष से अधिक और कम दोनों तरह के अपराध हों — तो पूरे मामले में 90 दिन की समय-सीमा लागू होती है।


दिन गिनने का तरीका — जहां परिवार गलती करते हैं

शुरुआत: पहली शारीरिक गिरफ्तारी की तारीख से। FIR की तारीख से नहीं।

गणना: हर कैलेंडर दिन — रविवार, सरकारी छुट्टियां, अदालत की छुट्टियां — सब शामिल।

उदाहरण: किसी को 1 जून को सहारनपुर कोतवाली से धारा 318 BNS (धोखाधड़ी — 10 वर्ष से कम) में गिरफ्तार किया गया। 60वां दिन 31 जुलाई है। अगर पुलिस ने 31 जुलाई तक चार्जशीट दाखिल नहीं की, तो उसी सुबह आवेदन दाखिल होना चाहिए।

निर्णायक नियम: यदि पुलिस 31 जुलाई को सुबह 11 बजे चार्जशीट दाखिल करती है और वकील दोपहर 2 बजे डिफॉल्ट जमानत आवेदन लगाता है — अधिकार खत्म। उसी दिन चार्जशीट दाखिल होना भी अधिकार समाप्त कर देता है।


सहारनपुर में आवेदन की प्रक्रिया

  • केस रिकॉर्ड से पहले रिमांड आदेश की तारीख निकालकर सटीक गिरफ्तारी तारीख तय करें।
  • 2. मजिस्ट्रेट-विचारणीय मामलों में मजिस्ट्रेट के सामने और सत्र न्यायालय-विचारणीय मामलों में सत्र न्यायालय में धारा 479 BNSS के तहत आवेदन दाखिल करें।

    3. आवेदन में लिखें: गिरफ्तारी की तारीख, बीते दिनों की संख्या, चार्जशीट दाखिल न होने का तथ्य।

    4. अदालत केस डायरी से सत्यापित करेगी।

    5. जमानत बॉन्ड और जमानतदार जमा होने पर रिहाई।


    सबसे सामान्य गलतियां जो अधिकार छीन लेती हैं

    1. 61वें या 91वें दिन का इंतजार। सबसे आम कारण। तब तक पुलिस एक दिन पहले चार्जशीट दाखिल कर चुकी होती है।

    2. गलत अदालत में आवेदन। सत्र न्यायालय-विचारणीय मामलों में मजिस्ट्रेट के पास जाना समय बर्बाद करता है।

    3. गिरफ्तारी की सटीक तारीख न जानना। गिरफ्तारी मेमो से सत्यापित करें — धारा 48 BNSS के तहत यह परिवार को देना अनिवार्य है।

    4. अधूरी चार्जशीट को पूर्ण मानना। पुलिस कभी-कभी अधूरा चालान दाखिल करती है। यह डिफॉल्ट जमानत के अधिकार को स्वतः समाप्त नहीं करता — लेकिन तत्काल कानूनी बहस की जरूरत है।


    डिफॉल्ट जमानत और चार्जशीट की समय-सीमा निगरानी के लिए सहारनपुर आपराधिक वकील से संपर्क करें। देखें: चार्जशीट के बाद क्या होता है | गिरफ्तारी के बाद पहले 24 घंटे

    चैंबर नंबर 71, सिविल कोर्ट, सहारनपुर — +91-76176-17777।

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

    डिफॉल्ट जमानत क्या है और यह नियमित जमानत से अलग कैसे है?+

    डिफॉल्ट जमानत (वैधानिक जमानत) एक निरपेक्ष अधिकार है — अदालत का विवेकाधीन उपाय नहीं। धारा 479 BNSS के अनुसार, यदि पुलिस 60 दिन (अधिकांश मामलों में) या 90 दिन (मृत्युदंड/आजीवन कारावास/10 वर्ष+ के मामलों में) में चार्जशीट दाखिल नहीं करती, तो आरोपी को जमानत देना अदालत के लिए अनिवार्य है — यह अदालत का विवेक नहीं, बल्कि अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है। लेकिन आरोपी को खुद आवेदन करना होगा — अदालत स्वयं जमानत नहीं देती।

    सहारनपुर में डिफॉल्ट जमानत के लिए 60 या 90 दिन कैसे गिने जाते हैं?+

    गिनती पहली शारीरिक गिरफ्तारी की तारीख से शुरू होती है — FIR की तारीख से नहीं, रिमांड आदेश की तारीख से नहीं। हर कैलेंडर दिन गिना जाता है — रविवार, सरकारी छुट्टियां, अदालती अवकाश सब मिलाकर। पुलिस यदि समय-सीमा के बाद एक दिन भी चार्जशीट दाखिल करे, तो यह अधिकार स्थायी रूप से समाप्त हो जाता है।

    यदि आरोपी पहले ही जमानत पर है और चार्जशीट समय पर नहीं आई तो?+

    धारा 479 BNSS का डिफॉल्ट जमानत अधिकार केवल उन आरोपियों के लिए है जो न्यायिक हिरासत में हैं। यदि आरोपी को पहले ही जमानत मिल चुकी है और वह जेल में नहीं है, तो हिरासत की गणना नहीं होती और डिफॉल्ट जमानत लागू नहीं होती।

    संबंधित कानूनी गाइड

    Criminal Law7 min read

    हत्या के मामले में जमानत — सहारनपुर में कौन सी अदालत, क्या मानक

    धारा 103 BNS (हत्या) गैर-जमानतीय अपराध है — मजिस्ट्रेट जमानत नहीं दे सकता। इस गाइड में समझें सहारनपुर सत्र न्यायालय में हत्या के मामले में जमानत कैसे मिलती है, क्या तर्क काम करते हैं और इलाहाबाद उच्च न्यायालय कब जाएं।

    Criminal Law8 min read

    SC/ST अत्याचार अधिनियम के मामले — सहारनपुर में जमानत, बचाव और आपके अधिकार

    SC/ST Prevention of Atrocities Act के तहत FIR दर्ज होने पर सत्र न्यायालय से अग्रिम जमानत नहीं मिलती, स्पेशल कोर्ट मामला सुनती है और DySP स्तर का अधिकारी जांच करता है। सहारनपुर में इस अधिनियम के तहत क्या करें — पूरी जानकारी।

    Criminal Law8 min read

    झूठी FIR दर्ज हुई सहारनपुर में? पांच कानूनी उपाय जो आपकी रक्षा करेंगे

    सहारनपुर में झूठी FIR कानूनी उत्पीड़न का सबसे सामान्य तरीका है। इस गाइड में जानें अग्रिम जमानत, FIR रद्द, धारा 182 BNS काउंटर कंप्लेंट, हेबियस कॉर्पस और दुर्भावनापूर्ण मुकदमे के लिए दीवानी दावे — पांच उपाय और सही क्रम।

    क्या आप सहारनपुर में इसी तरह की कानूनी समस्या का सामना कर रहे हैं?

    अकेले कानूनी प्रणाली में उलझने की आवश्यकता नहीं है। अपने विकल्पों का मूल्यांकन करने के लिए आज ही हमारे परामर्शदाता से संपर्क करें।

    अभी परामर्श बुक करें (₹99)अन्य गाइड देखें
    अभी कॉल करें
    व्हाट्सएप चैट