डिफॉल्ट जमानत: 60वें दिन आवेदन करें, नहीं तो अधिकार हमेशा के लिए खत्म
सहारनपुर में जब किसी को गिरफ्तार किया जाता है और पुलिस समय पर जांच पूरी नहीं कर पाती, तो कानून आरोपी को एक विशेष शस्त्र देता है — डिफॉल्ट जमानत (जिसे वैधानिक जमानत या अनिवार्य जमानत भी कहते हैं)।
यह कोई राहत नहीं — यह धारा 479 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत एक निरपेक्ष कानूनी अधिकार है, जो 1 जुलाई 2024 से CrPC की धारा 167(2) की जगह लागू है।
यह अधिकार शक्तिशाली है। लेकिन जैसे ही पुलिस चार्जशीट दाखिल करती है — चाहे अंतिम दिन की सुबह ही क्यों न हो — यह अधिकार हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है।
डिफॉल्ट जमानत क्या है?
नियमित जमानत में अदालत कई पहलू तौलती है: अपराध की गंभीरता, फरार होने का खतरा, सबूत से छेड़छाड़ की संभावना, आपराधिक इतिहास। अदालत का विवेक होता है।
डिफॉल्ट जमानत अलग है। यदि शर्तें पूरी हो जाएं, तो अदालत के पास कोई विवेक नहीं। उसे जमानत देनी ही होगी। सर्वोच्च न्यायालय ने बार-बार कहा है कि यह अधिकार अनुच्छेद 21 (व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) से सीधे जुड़ा है।
उद्देश्य स्पष्ट है: यदि राज्य समय-सीमा में जांच पूरी नहीं कर पाया, तो उसे आरोपी को हिरासत में रखने का कोई औचित्य नहीं।
दो समय-सीमाएं: 60 दिन और 90 दिन
60 दिन — अधिकांश आपराधिक मामलों के लिए। जब अपराध की सजा 10 वर्ष से कम हो (मृत्युदंड या आजीवन कारावास नहीं)।
90 दिन — जब अपराध में सजा है:
- मृत्युदंड
- आजीवन कारावास
- 10 वर्ष या अधिक कारावास
सहारनपुर में 90 दिन वाले सामान्य मामले: हत्या (धारा 103 BNS), गैर-इरादतन हत्या (धारा 105 BNS), बलात्कार (धारा 63 BNS), फिरौती के लिए अपहरण (धारा 140 BNS), NDPS में व्यावसायिक मात्रा।
FIR में यदि 10 वर्ष से अधिक और कम दोनों तरह के अपराध हों — तो पूरे मामले में 90 दिन की समय-सीमा लागू होती है।
दिन गिनने का तरीका — जहां परिवार गलती करते हैं
शुरुआत: पहली शारीरिक गिरफ्तारी की तारीख से। FIR की तारीख से नहीं।
गणना: हर कैलेंडर दिन — रविवार, सरकारी छुट्टियां, अदालत की छुट्टियां — सब शामिल।
उदाहरण: किसी को 1 जून को सहारनपुर कोतवाली से धारा 318 BNS (धोखाधड़ी — 10 वर्ष से कम) में गिरफ्तार किया गया। 60वां दिन 31 जुलाई है। अगर पुलिस ने 31 जुलाई तक चार्जशीट दाखिल नहीं की, तो उसी सुबह आवेदन दाखिल होना चाहिए।
निर्णायक नियम: यदि पुलिस 31 जुलाई को सुबह 11 बजे चार्जशीट दाखिल करती है और वकील दोपहर 2 बजे डिफॉल्ट जमानत आवेदन लगाता है — अधिकार खत्म। उसी दिन चार्जशीट दाखिल होना भी अधिकार समाप्त कर देता है।
सहारनपुर में आवेदन की प्रक्रिया
2. मजिस्ट्रेट-विचारणीय मामलों में मजिस्ट्रेट के सामने और सत्र न्यायालय-विचारणीय मामलों में सत्र न्यायालय में धारा 479 BNSS के तहत आवेदन दाखिल करें।
3. आवेदन में लिखें: गिरफ्तारी की तारीख, बीते दिनों की संख्या, चार्जशीट दाखिल न होने का तथ्य।
4. अदालत केस डायरी से सत्यापित करेगी।
5. जमानत बॉन्ड और जमानतदार जमा होने पर रिहाई।
सबसे सामान्य गलतियां जो अधिकार छीन लेती हैं
1. 61वें या 91वें दिन का इंतजार। सबसे आम कारण। तब तक पुलिस एक दिन पहले चार्जशीट दाखिल कर चुकी होती है।
2. गलत अदालत में आवेदन। सत्र न्यायालय-विचारणीय मामलों में मजिस्ट्रेट के पास जाना समय बर्बाद करता है।
3. गिरफ्तारी की सटीक तारीख न जानना। गिरफ्तारी मेमो से सत्यापित करें — धारा 48 BNSS के तहत यह परिवार को देना अनिवार्य है।
4. अधूरी चार्जशीट को पूर्ण मानना। पुलिस कभी-कभी अधूरा चालान दाखिल करती है। यह डिफॉल्ट जमानत के अधिकार को स्वतः समाप्त नहीं करता — लेकिन तत्काल कानूनी बहस की जरूरत है।
डिफॉल्ट जमानत और चार्जशीट की समय-सीमा निगरानी के लिए सहारनपुर आपराधिक वकील से संपर्क करें। देखें: चार्जशीट के बाद क्या होता है | गिरफ्तारी के बाद पहले 24 घंटे।
चैंबर नंबर 71, सिविल कोर्ट, सहारनपुर — +91-76176-17777।